Thursday, 8 September 2016

भारतीय महिलाओं के श्रृंगार एवं आभूषणों में भी छिपें हैं वैज्ञानिक कारण।

🔺सोलह श्रृंगार का हिन्दू धर्म में बड़ा महत्त्व है. इसके पीछे कई धार्मिक तर्क दिए जाते हैं और इसे पति की लंबी उम्र और वैवाहिक जीवन के सुखमय होने की वजह माना जाता है. आज जानिये धार्मिक परम्पराओं और मान्यताओं के पीछे के वैज्ञानिक कारण.
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सिंदूर लगाना

सिर के बालों के दो हिस्से करके बीच में सिंदूर लगाया जाता है. सिर के इस हिस्सें को महत्वपूर्ण और संवेदनशील माना जाता है. सिंदूर लगाने से दिमाग हमेशा सतर्क और सक्रिय रहता है. दरअसल, सिंदूर में मरकरी होता है जो अकेली ऐसी धातु है जो लिक्विड रूप में पाई जाती है. सिंदूर लगाने से शीतलता मिलती है और दिमाग तनावमुक्त रहता है.

कांच की चूड़ियां

शादीशुदा महिलाओं का कांच की चूड़ियां पहनना शुभ माना जाता है. नई दुल्हन की चूड़ियों की खनक से उसकी मौजूदगी और आहट का एहसास होता है. लेकिन इसके पीछे एक विज्ञान छुपा है. दरअसल, कांच में सात्विक और चैतन्य अंश प्रधान होते हैं. इस वजह से चूड़ियों के आपस में टकराने से जो आवाज़ पैदा होती है, वह नकारात्मक ऊर्जा को दूर भगाती है.

मंगलसूत्र

माना जाता है कि मंगलसूत्र धारण करने से रक्तचाप नियंत्रित रहता है. भारतीय हिंदू महिलाएं काफी शारीरिक श्रम करती हैं, इसलिए उनका ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहना जरूरी है. विज्ञान कहता है कि मंगलसूत्र शरीर से स्पर्श होना चाहिए, ताकि वह ज्यादा से ज्यादा असर कर सके.

बिछुआ

शादीशुदा हिंदू महिलाओं में पैरों में बिछुआ जरूर नजर आ जाता है. इसे पहनने के पीछे भी विज्ञान छिपा है. पैर की जिन उंगलियों में बिछुआ पहना जाता है, उनका कनेक्शन गर्भाशय और दिल से है. इन्हें पहनने से महिला को गर्भधारण करने में आसानी होती है और मासिक धर्म भी सही रहता है. चांदी का होने की वजह से जमीन से यह ऊर्जा ग्रहण करती है और पूरे शरीर तक पहुंचाती है.

नाक की लौंग

नाक में लौंग पहने के पीछे का विज्ञान कहता है कि इससे सांस नियंत्रित होती है.

कुमकुम

कुमकुम भौहों के बीच में लगाया जाता है. यह बिंदु अज्ना चक्र कहलाता है. सोचिए जब भी आपको गुस्सा आता है तो तनाव की लकीरें भौहों के बीच सिमटी हुई नजर आती हैं. इस बिंदु पर कुमकुम लगाने से शांति मिलती है और दिमाग ठंडा रहता है.

कान में बालियां

कानों में झुमके, बालियां आदि पहनना फैशन ही नहीं है, इसका शरीर पर एक्युपंचर इफेक्ट भी पड़ता है. कान में छेद कराकर उसमें कोई धातु धारण करना मासिक धर्म को नियमित करने में सहायक होता है. शरीर को ऊर्जावान बनाने के लिए सोने के ईयर रिंग्स और ज्यादा ऊर्जा को कम करने के लिए चांदी के ईयररिंग्स पहनने की सलाह दी जाती है.

पायल

चांदी की पायल पहनने से पीठ, एड़ी, घुटनों के दर्द और हिस्टीरिया रोगों से राहत मिलती है. साथ ही चांदी की पायल हमेशा पैरों से रगड़ती रहती है, जो स्त्रियों की हड्डियों के लिए काफी फ़ायदेमंद है. इससे उनके पैरों की हड्डी को मज़बूती मिलती है, साथ ही ये शरीर की बनावट को नियंत्रित भी करती है.

🌹सनातन संस्कृति संघ🌹

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उत्तम और विराट काल गणना

ऐसी उत्तम और विराट तथा बारीक़ से बारीक़ काल गणना हमारे सनातन शास्त्रों के अतिरिक्त कहीं नहीं है |

आइये  कुछ नया जानें :

क्रति = सैकन्ड का 34000वाँ भाग
1 त्रुति = सैकन्ड का 300वाँ भाग
2 त्रुति = 1 लव
1 लव = 1 क्षण
30 क्षण = 1 विपल
60 विपल = 1 पल
60 पल = 1 घड़ी (24 मिनट )
2.5 घड़ी = 1 होरा (घन्टा)
24 होरा = 1 दिवस (दिन या वार)
7 दिवस = 1 सप्ताह
4 सप्ताह = 1 माह
2 माह = 1 ऋतु
6 ऋतु = 1 वर्ष
100 वर्ष = 1 शताब्दी
10 शताब्दी = 1 सहस्राब्दी
432 सहस्राब्दी = 1 युग
2 युग = 1 द्वापर युग
3 युग = 1 त्रेता युग
4 युग = सतयुग
1 महायुग = सतयुग + त्रेतायुग + द्वापरयुग + कलियुग
76 महायुग = मनवन्तर
1000 महायुग = 1 कल्प
1 नित्य प्रलय = 1 महायुग (धरती पर जीवन अन्त और फिर आरम्भ)
1 नैमितिका प्रलय = 1 कल्प (देवों का अन्त और जन्म)
1 महाकाल = 730 कल्प
(ब्रह्मा का अन्त और जन्म)

तनिक ध्यान दीजिये।
हमारी परम्पराओं के पीछे कितना गहन विज्ञान छिपा हुआ है।
ये इस देश का दुर्भाग्य है कि हमारी परम्पराओं को समझने के लिए जिस विज्ञान की आवश्यकता है वो हमें पढ़ाया नहीं जाता और विज्ञान के नाम पर जो हमें पढ़ाया जा रहा है उस से हम अपनी परम्पराओं को समझ नहीं सकते |
विश्व का सबसे बड़ा और वैज्ञानिक समय गणना तन्त्र यही है।
जो हमारे देश भारत में बना।
ये हमारा भारत है जिस पर हमको गर्व है।

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जय भवानी जय शिवाजी

वह क्या कारण थे कि, शिवाजी महाराज के समय में हर जगह भगवा रंग नजर आ रहा था और हर-हर महादेव का राग चारों  दिशाओं से सुना जा सकता था?

जब आप शिवाजी महाराज के पूरे जीवनकाल को पढ़ते हैं तो आपको वहां शिवाजी महाराज के ऐसे कई निर्णय नज़र आयेंगे जिसके कारण यह सब संभव हुआ था।
तो आज हम आपके लिए उन्हीं निर्णयों में से पांच प्रमुख निर्णय लायें हैं और आज भी यह बातें हर व्यक्ति को एक सफल व्यक्ति बना सकती हैं।

1. उस समय में पुस्तकों में हुए थे बड़े बदलाव शिवाजी महाराज महसूस कर रहे थे कि, 16 सदी में मुस्लिम शासकों ने भारतीय इतिहास के साथ बहुत खिलवाड़ किया है और हिंदू धर्म पुस्तकों में भी अनेक अरबी शब्द और उर्दूं शब्दों को घुसेड कर हमारे हिंदू युवाओं को मुस्लिमो द्वारा षड्यंत्र करके भ्रमीत किया जा रहा था।
एक अनुमान के अनूसार बाबर और मुग़ल ने तब तक हिन्दुस्थान की कई पुस्तकों में 60% प्रतीशत मूलभूत हिन्दुस्तानी शब्दों को ही खत्म कर दिया था, इसके कारण हिंदू युवा उर्दू की तरफ बढ़ रहे थे, और उन्हीं का रचाइतिहास पढ़ना शुरू कर रहे थे। मुस्लिम शासकों की इसी चाल को समझते हुए शिवाजी महाराज ने भारतीय इतिहास वापस किताबों से जोड़ा और यह उनकी बड़ी सफलता थी। अब कुछ ऐसा ही वर्तमान में हो रहा है, क्योंकि, हमारा अपना सत्य इतिहास पुस्तकों से गायब है।

2. हिन्दू एकजुटता से शिवाजी महाराज ने 15 साल की उम्र में अपनी पहली लड़ाई लड़ी थी एवं जीती भी थी। इस सफलता के पीछे जो मुख्य कारण हिन्दुओं की एकजुटता थी।
शिवाजी महाराज ने अपने स्तर पर हर हिन्दू राजा को खुद से जोड़ने के प्रयास किये। इसका फल यह हुआ कि, जो हिन्दू अभी तक अलग-थलग भटक रहे थे वह एक हो गये और एक साथ होकर लड़ने लगे।
अपितू उन्हों ने हिन्दुओं को एकता का बल दिखाया था।

3. हिंदू सनातन धर्म रहेगा तो ही हम बचे रहेंगे..!!
शिवाजी महाराज इस बात को मानते थे कि, अगर धर्म रहेगा तो हम रहेंगे और धर्म खत्म हो गया तो हिन्दू खुद ही खत्म हो जायेंगे। जैसा कि, मुस्लिम शासक सीधे हिंदू धर्म पर चोट कर रहे थे..!!! उन्हों ने सिर्फ और सिर्फ धर्म की रक्षा की और धर्म ने ही हिन्दुओं की रक्षा की थी।
अतः आज हमें धर्म की रक्षा की प्रण-व्रत लेना आवश्यक है..!!!

4. बलिदान से कभी नहीं डरे। शिवाजी शिवाजी महाराज जानते थे कि, इतिहास जीतने वालों को हमेशा यद् रखता है और जीत बलिदान भी मांगती है।
शिवाजी ने कभी यह नहीं देखा कि, शत्रू कौन हैं और कितने हैं। शिवाजी महाराज अगर निर्णय करते थे कि, अब मातृभूमि की रक्षा इस दुश्मन से करनी है तो उस निर्णय से फिर हटते नहीं थे। यही इनका निर्णय इनको सभी योद्धाओं में इतना प्रमुख बना देता था।

5. कभी दुश्मन पर विश्वास नहीं करने का निर्णय शुरुआत में कई बार शिवाजी महाराज ने दुश्मनों पर विश्वास किया था लेकिन एक समय बाद शिवाजी महाराज ने तय कर लिया था कि, अब दुश्मन पर विश्वास नहीं करना है। औरंगजेब ने शिवाजी को अनेक धोखे दिए थे लेकिन बाद में जब शिवाजी महाराज का असली रूप इसने देखा था तो वह झुकने पर मजबूर हो गया था।
इसलिए हमें भी आज हिंदूधर्म के दुश्मनों की पहचान करके उन पर कभी भी लेशमात्र विश्वास नहीं करना चाहिए..!!!

शिवाजी महाराज के जीवन से हमें इस तरह के कई सफलता मंत्र प्राप्त हो सकते हैं।
लेकिन,
असल बात यह है कि, हम हिंदू शिवाजी महाराज के जीवन यात्रा को पढ़ ही नहीं रहे हैं।
शिवाजी जी से हमें गीता ज्ञान जैसी कई महत्वपूर्ण बातें मिल सकती हैं और इन बातों को अगर हिन्दू घोल के पी जाएँ तो फिर कोई भी इस धर्म पर चोट नहीं कर सकता है..!!!
।।जयतु जयतु हिंदू राष्ट्रम् ।।

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Wednesday, 7 September 2016

संगत साधु की, हरे कोटि अपराध

शर साधु-संतों का जब स्वागत कर रहे थे, पत्तलें बाँट रहे थे तब ऋषियों ने कहाः "कन्हैया ! तुम्हें यह सब करने की क्या जरूरत है ? तुम तो आदिनारायण हो ! यहाँ वसुदेव के बेटे होकर लीला कर रहे हो तो क्या हुआ ? हम तो तुम्हें पहचानते हैं। ये पत्तले बाँटने से और उठाने से तुमको क्या लाभ होगा ?"

श्रीकृष्ण कहते हैं- "पचास वर्ष की निष्कपट भक्ति से हृदय का अज्ञान नहीं मिटता है, लेकिन ब्रह्मवेत्ता सत्पुरूष की सेवा से वह कार्य हो जाता है। हजारों साधुओं में आप जैसे एकाध ब्रह्मज्ञानी महापुरूष भी मिल जाएगा तो मेरी सेवा सार्थक हो जाएगी। मेरे साथ जो सेवा कर रहे हैं उनका भी कल्याण हो जाएगा। इसलिए महाराज ! मुझे पैर धोने दो।"

श्रीकृष्ण के इन वचनों से स्पष्ट होता है कि पचास वर्ष की अपने ढंग की तपस्या, व्रत या नियम भी दो घड़ी के सत्संग की बराबरी नहीं कर सकते इसलिए तुलसीदास जी की बात हमको यथार्थ और सचमुच में प्रिय लगती हैः

एक घड़ी आधी घड़ी, आधी में पुनि आध।
तुलसी संगत साधु की, हरे कोटि अपराध।।
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Monday, 5 September 2016

सुखी रहने का तरीका

*एक बार की बात है संत तुकाराम अपने आश्रम में बैठे हुए थे। तभी उनका एक शिष्य, जो स्वाभाव से थोड़ा क्रोधी था उनके समक्ष आया और बोला-*

*गुरूजी, आप कैसे अपना व्यवहार इतना मधुर बनाये रहते हैं, ना आप किसी पे क्रोध करते हैं और ना ही किसी को कुछ भला-बुरा कहते हैं? कृपया अपने इस अच्छे व्यवहार का रहस्य बताइए?*

*संत बोले- मुझे अपने रहस्य के बारे में तो नहीं पता, पर मैं तुम्हारा रहस्य जानता हूँ !*

*“मेरा रहस्य! वह क्या है गुरु जी?” शिष्य ने आश्चर्य से पूछा।*

*”तुम अगले एक हफ्ते में मरने वाले हो!” संत तुकाराम दुखी होते हुए बोले।*

*कोई और कहता तो शिष्य ये बात मजाक में टाल सकता था, पर स्वयं संत तुकाराम के मुख से निकली बात को कोई कैसे काट सकता था?*

*शिष्य उदास हो गया और गुरु का आशीर्वाद ले वहां से चला गया।*

*उस समय से शिष्य का स्वभाव बिलकुल बदल सा गया। वह हर किसी से प्रेम से मिलता और कभी किसी पे क्रोध न करता, अपना ज्यादातर समय ध्यान और पूजा में लगाता। वह उनके पास भी जाता जिससे उसने कभी गलत व्यवहार किया था और उनसे माफ़ी मांगता। देखते-देखते संत की भविष्यवाणी को एक हफ्ते पूरे होने को आये।*

*शिष्य ने सोचा चलो एक आखिरी बार गुरु के दर्शन कर आशीर्वाद ले लेते हैं। वह उनके समक्ष पहुंचा और बोला-*

*गुरुजी, मेरा समय पूरा होने वाला है, कृपया मुझे आशीर्वाद दीजिये!”*

*“मेरा आशीर्वाद हमेशा तुम्हारे साथ है पुत्र। अच्छा, ये बताओ कि पिछले सात दिन कैसे बीते? क्या तुम पहले की तरह ही लोगों से नाराज हुए, उन्हें अपशब्द कहे?”*

*संत तुकाराम ने प्रश्न किया।*

*“नहीं-नहीं, बिलकुल नहीं। मेरे पास जीने के लिए सिर्फ सात दिन थे, मैं इसे बेकार की बातों में कैसे गँवा सकता था?*
*मैं तो सबसे प्रेम से मिला, और जिन लोगों का कभी दिल दुखाया था उनसे क्षमा भी मांगी” शिष्य तत्परता से बोला।*

*"संत तुकाराम मुस्कुराए और बोले, “बस यही तो मेरे अच्छे व्यवहार का रहस्य है।"*
*"मैं जानता हूँ कि मैं कभी भी मर सकता हूँ, इसलिए मैं हर किसी से प्रेमपूर्ण व्यवहार करता हूँ, और यही मेरे अच्छे व्यवहार का रहस्य है।*

*शिष्य समझ गया कि संत तुकाराम ने उसे जीवन का यह पाठ पढ़ाने के लिए ही मृत्यु का भय दिखाया था ।*

*वास्तव में हमारे पास भी सात दिन ही बचें हैं :-*

*रवि, सोम, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि, आठवां दिन तो बना ही नहीं है ।*

👏👏  *"आइये आज से परिवर्तन आरम्भ करें।"* 👏👏

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Wednesday, 17 August 2016

स्वदेशी विदेशी वस्तुओ की सूची

दन्त मंजन / पेस्ट =
स्वदेशी — विको वज्रदंती, बैद्यनाथ, चोइस, नीम, डाबर , एंकर, मिस्वाक, बबूल, प्रोमिस, दन्त कांति दन्त मंजन।
विदेशी — अधिकतर दन्त पेस्ट हड्डियों के पावडर से बनते है, जेसे कोलगेट, हिंदुस्तान यूनिलीवर ( पहले हिन्स्तान लीवर ), क्लोस-अप, पेप्सोडेंट, एम, सिबाका, एक्वा फ्रेश, एमवे, ओरल बी, क्वांटम आदि ।

टुथ ब्रश ( दन्त साफ करने का उपकरण ) ==
स्वदेशी — प्रोमिस, अजय, अजंता, मोनेट, रोयल, क्लास्सिक, डोक्टर स्ट्रोक ।
विदेशी — कोलगेट, क्लोस-अप, पेप्सोडेंट, सिबाका, अक्वा फ्रेश, ओरल-बी, हिंदुस्तान यूनिलीवर ।

बाथ सोप (स्नान करने का साबुन) ==
स्वदेशी — निरमा , मेदिमिक्स, निम्, नीमा, जस्मीन, मेसोर सेंडल, कुटीर, सहारा, पार्क अवेन्यु, सिंथोल, हिमानी ग्लिसरीन, फिर फ्लो, न १, शिकाकाई, गंगा, विप्रो, संतूर, काया कांति, काया कांति एलो वेरा ।
विदेशी — हिंदुस्तान यूनिलीवर, लो’ ओरीअल , लाइफ ब्वाय ( कोई डर नहीं ) , ले सेंसि, डेनिम, चेमी, डव, रेविओं, पिअर्स, लक्स, विवेल, हमाम, ओके, पोंड्स, क्लिअर्सिल, पमोलिवे, एमवे, जोनसन बेबी, रेक्सोना, ब्रिज , डेटोल ।

शेम्पू, ( बाल धोने के लिए ) ==
स्वदेशी — विप्रो, पार्क अवेन्यु, स्वस्तिक, आयुर, केश निखर, हेअर एंड केअर, नैसिल, अर्निका, वेलवेट, डाबर, बजाज, नेल, लेवेंडर, गोदरेज, वाटिका ।
विदेशी –हेलो कोलगेट पामोलिव, हिंदुस्तान यूनिलीवर, लक्स, क्लिनिक प्लस, रेव्लों, लक्मे, पी एंड जी , हेड एंड शोल्डर, पेंटीन, डव, पोंड्स, ओल्ड स्पेस, शोवर तो शोवर, जोहानसन बेबी ।

कपडे / बर्तन धोने का पावडर ==
स्वदेशी — टाटा शुद्ध, नीमा, सहारा, लो’ ओरीअल , निरमा, स्वस्तिक, विमल, हिपोलिन, देना, ससा, टी सीरिज, डोक्टर देत, घडी डिटर्जन, गेंतिल, उजाला, रानिपल, निरमा, चमको, दीप
विदेशी — हिंदुस्तान यूनिलीवर, सर्फ़, रीन, सनलाईट, व्हील, विम, अरिअल, टाइड, हेंको, रेविअल, एमवे, क्वांटम, वुल्वाश, इजी, रोबिन ब्लू, टिनापोल, स्काईलार्क

दाढ़ी / शेविंग बनाने की क्रीम ==
स्वदेशी — पार्क अवेन्यु, प्रिमीअम, वि जोन, लो’ ओरीअल , इमामी, बलसारा, गोदरेज
विदेशी — ओल्ड स्पाइस, पामोलिव, पोंड्स, जिलेट, एरास्मिक, डेनिम, यार्डली

दाढ़ी / शेविंग पत्ती / ब्लेड ==
स्वदेशी — टोपाज, गेलंत ( gallant), सुपरमेक्स, लसर, एस्क्वेर, सिल्वर प्रिंस, प्रिमिअम
विदेशी — जिलेट, सेवन ‘ओ’ क्लोक, एरास्मिक, विल्मेन, विल्तेज आदि

क्रीम / पावडर ==
स्वदेशी — बोरोसिल, आयुर, इमामी, विको, बोरोप्लस, बोरोलीन, हिमामी, नेल, लावेंदर, हेअर एंड केअर, निविय, हेवन्स, सिंथोल, ग्लोरी, वेलवेट (बेबी)
विदेशी — हिंदुस्तान यूनिलीवर, फेअर एंड लवली, लक्मे, लिरिल, डेनिम, रेव्लों, पी एंड जी, ओले, क्लिएअर्सिल, क्लिएअर्तोन, चारमी, पोंड्स, ओल्ड स्पाइस, डेटोल ( ले १००% श्योर) , जॉन्सन अँड जॉन्सन

वस्त्र रेडीमेड ==
स्वदेशी — केम्ब्रिज, पार्क अवेन्यु, ओक्जेम्बर्ग ( ओक्सेम्बेर्ग) बॉम्बे डाइंग, रफ एंड टफ, ट्रिगर, किलर जींस, पिटर इंग्लेंड, डीजे अँड सी ( DJ&C ) ये हमारी ही मानसिकता है की हमारी कंपनिया हमें लुभाने के लिए अपने उत्पादों का विदेशी नाम रखती है ।
विदेशी — व्रेंग्लर, नाइकी, ड्यूक, आदिदास, न्यूपोर्ट, पुमा आदि

धड़ियाँ ==
स्वदेशी — एच एम टी, टाइटन, मेक्सिमा, प्रेस्टीज, अजंता आदि
विदेशी — राडो, तेग हिवर, स्विसको, सेको, सिटिजन, केसिओ

पेन पेन्सिल ==
स्वदेशी — शार्प, सेलो, विल्सन, टुडे, अम्बेसेडर, लिंक, मोंतेक्स, स्टिक, संगीता, लक्जर, अप्सरा, कमल, नटराज, किन्ग्सन, रेनोल्ड, अप्सरा,
विदेशी — पारकर, निच्कोल्सन, रोतोमेक, स्विसएअर , एड जेल, राइडर, मिस्तुबिशी, फ्लेअर, यूनीबॉल, पाईलोट, रोल्डगोल्ड

पेय ==
स्वदेशी — दुग्ध, लस्सी, ताजे फलों के रस, निम्बू पानी,नारियल का पानी, मिल्कशेक, ठंडाई, जलजीरा, रूह अफजा, रसना, फ्रूटी, एपी फ़िज़, ग्रेपो, जम्पिं, शरबत , डावर्स , एलएमएन, जलानी जलजीरा आदि
विदेशी — ( एक घंटे में चार कोल्ड ड्रिंक पिने से मृत्यु निश्चित है ) धीमा जहर कोका कोला, पेप्सी, फेंटा स्प्राईट, थम्स-अप, गोल्ड स्पोट, लिम्का, लहर, सेवन अप, मिरिंडा, स्लाइस, मेंगोला, निम्बुज़ आदि

चाय काफी ==
स्वदेशी — टाटा, ब्रह्मपुत्र, असम, गिरनार, वाघ बकरी, दिव्य पेय
विदेशी — लिप्टन, टाइगर, ग्रीन लेबल, येलो लेबल, चिअर्स, ब्रुक बोंड रेड लेबल, ताज महल, गोद्फ्रे फिलिप्स, पोलसन, गूद्रिक, सनराइस, नेस्ले, नेस्केफे, रिच , ब्रू आदि

शिशु आहार एवं दूध पावडर ===
स्वदेशी — शहद, डाल पानी, उबले चावल, तजा फलों का रस, अमूल, इंडाना, सागर, तपन, मिल्क केअर
विदेशी — नेस्ले, लेक्टोजन सेरेलेक, एल पी ऍफ़, मिल्क मेड, नेस्प्रे, ग्लेक्सो, फेरेक्स

कुल्फी / आइसक्रीम ==
स्वदेशी — घर की बनी कुल्फी, अमूल, वाडीलाल, दिनेश, हवमोर, गोकुल, दिनशा, जय , पेस्तोंजी
विदेशी — वाल्स, क्वालिटी, डोलोप्स, बास्किन एंड रोबिनस, केडबरी.. अधिकतर आइसक्रीम में जनवरी की आंतो की परत होती है

नमक ==
स्वदेशी — टाटा, अंकुर , सूर्य, ताजा, तारा, निरमा, सेंधव नमक.
विदेशी — अन्नपुर्णा , आशीर्वाद आटा, केप्टन कुक, हिंदुस्तान लीवर , किसान, पिल्सबरी आदि

नमकीन / स्नेक्स / चिप्स ==
स्वदेशी — बीकाजी, बिकानो, हल्दीराम, बालाजी, हिपो , पार्ले, A1, गार्डन आदि
विदेशी — अंकल चिप्स, पेप्सी, रफेल्स, होस्टेस, फन्मच, कुरकुरे, लेज आदि

टमाटर सौस, चटनिया, फ्रूट जेम ==
स्वदेशी — घर के बने हुए चटनिया, इंडाना, प्रिया, रसना, फ्रूट जाम, टिल्लूराम , मनोज, सिल, निलंस, रसना, कर्नल, पंतजलि
विदेशी — नेस्ले, ब्रुक बोंड, किसान, हेंज, फिल्ड फ्रेश, मेगी सौस

चोकलेट / दूध पावडर ==
स्वदेशी — गुड के साथ मूंगफली या बादाम लाभप्रद है, पार्ले, बेक्मंस, क्रिमिचा, शंगरीला, इंडाना, अमूल, रावलगाँव, ब्रिटानिया.
विदेशी — अधिकतर चोकलेट में अर्सेलिक जहर मिला होता है केडबरी, बोर्नविटा , होर्लिक्स, न्यूट्रिन, विक्स, मिल्किबर, इक्लेअर्स , मंच, पार्क, डेरिमिल्क, बोर्नविले, बिग बबल, एलपेनलिबें, सेंटरफ्रेश, फ्रूट फ्रेश, परफीती आदि

रेडीमेड खाना ==
स्वदेशी — घर का खाना, हाथो से बनाया हुआ या किसी पास के स्वच्छ शाकाहारी होटल का
विदेशी — मेगी, हेंज, नौर , डोमिनोज, पिज्जा हट , फ्रिन्तो-ले

पानी ==
स्वदेशी — घर का उबला हुआ पानी, बिसलेरी, हिमालय, रेल नीर, यस, गंगा आदि
विदेशी — एक्वाफिना, किनली, बिल्ले, पुरे लाइफ, एवियन, सेन पिल्ग्रिमो, पेरिअर आदि

शक्तिवर्धक ===
स्वदेशी — च्यवनप्राश सबसे उत्तम ८०% तक , न्युत्रमुल, मल्तोवा, अमृत रसायन, बादाम पाक. आदि
विदेशी — बूस्ट, पोलसन, बोर्नविटा, होर्लिक्स, प्रोतिनेक्स, स्प्राउट्स, कोमप्लैन

इलेक्ट्रोनिक्स वस्तु ==
स्वदेशी — ओनिडा, बी पी एल, विडियोकोन, अकाई ( आज कल नाम सुनने को नहीं मिलता ) , टी- सीरिज , सलोरा, वेस्टर्न, क्रोवन, टेक्सला, गोदरेज उषा, ओरीअंट, खेतान, पी एस पी औ, बजाज, सिन्नी, शंकर, टी-सीरिज, क्राम्पटन,
विदेशी —- सोनी, फिलिप्स, हुंदा , सेन्सुई, शार्प, एलजी, देवू , सेन्यो, नेशनल पेनासोनिक केनवुड, थोमसन, सेमसंग, हिताची, तोशिबा, कोनिका, पयोनिअर, केल्विनेटर, वर्ल्फुल, इलेक्ट्रोलक्स आई ऍफ़ बी, हायर सिंगर, महाराजा, जी इ, रेलिमिक्स, केनस्टार, मृत, ब्रोउन, नेशनल, फिलिप्स

मोबाइल फ़ोन / सेवाए ===
स्वदेशी — मेक्स, ओनिडा, माइक्रोमेक्स, उषा-लक्सस, अजंता, ओर्पट, आइडिया, एअरटेल, रिलाइंस, टाटा इंडिकोम, एमटीएनएल, लूप, कार्बन, लावा, लेमन, भारती बीटल
विदेशी — नोकिया, फ्लाई, मोटोरोला, एचटीसी, सोनी एरिक्सन, एसर, वर्जिन, वोडाफोन, एम टी एस , एल जी, सेमसंग, हायर, डॉकोमो आदि

खाद्य तेल सरसों का तेल ====
स्वदेशी —-, कच्ची घानी का तेल,
विदेशी —- डालडा ब्रांड, आई टी सी ब्रांड, हिंदुस्तान यूनिलीवर ब्रांड, फिल्ड फ्रेश ब्रांड के सभी वस्तुओ का बहिष्कार करे

कंप्यूटर ===
स्वदेशी — एच सी एल, विप्रो
विदेशी —- तोशिबा, एसर, एच पी, डेल, लिनोवो, सेमसंग, सोनी, आई. बी. एम. कोम्पेक आदि

दुपहिया वाहन ====
स्वदेशी —- हीरो, बजाज ( बजाज स्कूटर के बारे में सबको पता है, एक्टिवा से कड़ी टक्कर मिलने के कारण बजाज स्कूटर की जगह एक्टिवा दीखता है हमारी सडको पर,) टी वि एस, महिंद्रा, काइनेटिक
विदेशी — कावासाकी, होंडा, हुंडई, एक्टिवा, इटरनो, रोयल एनफील्ड, हर्ली डेविडसन, स्प्लेंडर , पेशन

वाहन ===
स्वदेशी — लेंड रोवर, जगुआर, इंडिका, नेनो, टाटा मेजिक, बोलेरो, सुमो, सफारी, प्रेमिअर, अम्बसेदर, अशोक लेलेंड, स्वराज, महिंद्रा ट्रेक्टर, जाइलो, रेवा, अतुल, टी.व्ही.एस
विदेशी — हुंडई, सेंट्रो, वोल्सवेगन, मर्सडीज, टोयोटा, निसान, स्कोडा, रोल्स रोयस, फेंटम, फोर्ड, जनरल, शेर्वोलेट, जोन डिअर, मारुति सुजुकी, लोगन

बैंक ===
स्वदेशी — इलाहाबाद बैंक, बैंक ऑफ़ बड़ोदा, बैंक ऑफ़ इंडिया, बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र, आई डी बी आई, केनरा बैंक, सेन्ट्रल बैंक, देना बैंक, कोर्पोरेशन बैंक, इंडियन बैंक, इंडियन ओवरसिस बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, सिंडिकेट बैंक, युको बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया, युनाइटेड बैंक ऑफ़ इंडिया, विजया बैंक, आंध्र बैंक, स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया, कोटक महिंद्रा, एक्सिस बैंक, यस बैंक, इडुसलेंड बैंक, धनलक्ष्मी, बैंक, सारस्वत बैंक, फेडरल बैंक, आई एन जी वैश्य बैंक, करुर वैश्य बैंक, कर्नाटका बैंक , लक्ष्मी विलाश बैंक, स्टेट बैंक ऑफ़ बीकानेर एंड जयपुर, साउथ इंडियन बैंक, नैनीताल बैंक आदि
विदेशी —- बैंक एचडीएफसी (HDFC), आई.सी.आई.सी.आई ( ICICI ), एबीएन एमरो, अबू धाबी बैंक, बीएनपी परिबास, सिटी बैंक, डच बैंक (Deutsche Bank), एच इस बी सी (HSBC), जे पि मोर्गन, स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक, तयब बैंक, स्कोटिया बैंक, अमेरिकन एक्सप्रेस बैंक, एंटवर्प बैंक, अरब बंगलादेश, बैंक ऑफ़ अमेरिका, बहरीन कुवैत, टोक्यो मित्सुबिशी बैंक, बार्कले बैंक, चाइना ट्रस्ट, क्रुंग थाई बैंक, सोनाली बैंक, शिन्हन बैंक, ओमान इंटरनेशनल बैंक, स्टेट बैंक ऑफ़ मौरिशश, डी बैंक ऑफ़ न्युयोर्क, ऑस्ट्रेलियन बैंक, फोर्टिस बैंक, कोमन वेल्थ बैंक, रोयल बैंक ऑफ़ कनाडा, अमीरात बैंक, जर्मन बैंक,

जूते / चप्पल ===
स्वदेशी — लिबर्टी, लखानी, स्काई, भारत लेदर, एक्शन, रिलेक्सो, पेरगोन, पोद्दार, वाइकिंग, बिल्ली, कार्नोबा, डीजे अँड सी ( DJ&C ), बफेलो, रिग
विदेशी — पुमा, बाटा, पॉवर, बीएमसी, एडीडास, नाइकी, रिबोक, फीनिक्स, वुडलेंड, लाबेल, चेरी ब्लोसम, कीवी, ली कूपर, रेड चीफ, कोलंबस

ऐसी विदेशी कंपनियाँ भी है जिसमे आधे से भी कम % भारतीय पैसा लगा हुआ है तो वे भी विदेशी हुई, इसी तरह भारतीय कंपनी मे विदेशी ५०% से ज्यादा पैसा लगा है तो वह विदेशी है,  आप यह पता भी लगाए की आप जिस कंपनी का माल खरीद रहे है है क्या वह पूर्णतया स्वदेशी है ? जेसे मारुति कंपनी मे ५४% पैसा सुजुकी कंपनी का है , और अब सरकार का इस कंपनी मे कुछ भी हिस्सा नहीं है, उसने अपना १८% हिस्सा भी शिक्षण संस्थानो को बेच दिया ! ये जरूरी नहीं की बिग बाजार कुछ विदेशी ब्रांड को अपने मॉल / ब्रांड के तले बेचता हो तो वे स्वदेशी है।

भारत स्वाभिमान दल

लोकतंत्र का मतलब ?

14अगस्त, एक सरकारी स्कुल का 12-13 वर्ष का विद्यार्थी हाथ में तिरंगा झंडा लेकर जा रहा था, मैंने कौतूहलवश पूछा कि ये क्या है, उसने कहा 'अंकल 15 अगस्त को मैं और मेरी छोटी बहन अपने टपरे पर झंडा वंदन करेंगे'
मैंने कहा "बेटा ये तो बहुत अच्छी बात है, एक बात और बताओ, लोकतंत्र का मतलब समझते हो...???"
उसका जवाब सुनकर मेरे पैरोँ तले जमींन ही खसक गयी, पढ़िए उसका जवाब क्या था...

"अंकल,15 अगस्त 47 को हमारा देश आजाद हुआ था,उसके बाद हमारे यहाँ लोकतंत्र आया, दादाजी बताते है की अंग्रेजो ने बहुत अत्याचार किये, लेकिन अंग्रेज़ो में अनुशासन भी बहुत था, टाईम के बड़े पाबन्द थे,वो जनता को ठीक करना जानते थे, कानून का पालन नही करने वालो को तत्काल जेल में डाल देते थे, उनके द्वारा बनाई गई सड़के और पुल आज भी मौजूद है, उस जमाने में घोटाले, भ्रष्टाचार किसी को पता ही नही था, ....."

मैंने बीच में ही टोकते हुए कहा "बेटा, मैं लोकतंत्र के बारे में पूछ रहा हूँ,"

"अंकल, मैं आगे वही तो बता रहा हूँ, उस जमाने में हम अंग्रेजो के गुलाम थे,ऐसा दादाजी बताते है,
आज लोकतंत्र है, मतलब चुनाव में जो दादा पहलवान टाईप के गुंडे लोग खड़े हो जाते है, वो जीत जाते है, हमारे पड़ोस वाला कलुआ अब पार्सद बन गया है, 6 महीने में ही बड़ी गाडी खरीद ली है, पेले तो उसके माँ बाप हम्माली करते थे,अब पुराना मकान तोड़ कर उसे आगे तक बढ़ाया और नया मकान बना रहा है,पुलिस वाले भी उसके दोस्त है, रात को ओटले पर ये सब दोस्त दारू पीते है, मोहल्ले वाले कुछ नही बोलते, मेरे परीक्षा के दिनों में मैं पढ़ाई नही कर पा रहा था,इतना तमाशा करते है अंकल ये लोग,"
"अंकल जब कोई कुछ बोलने वाला ही ना बचे तो ये नेता लोग अपनी मन मर्जी से ही चलेंगे,"

मैंने उसे फिर पुचकारा, "बेटा इसे लोकतंत्र नही कहते है,"

उसने कहा," फिर आप ही बताओ किसे कहते है,जब हर आदमी को अपनी मर्जी से चलने की आजादी है, कही भी रास्ते में गुटखा,पान तम्बाखू थूक दिया, कही भी खड़े होकर गन्दगी कर दी, लाल बत्ती सिग्नल तोड़ दिया, ये सब... ..............!"

उसके मुँह से लोकतंत्र की ये "भयानक" परिभाषा सुन कर मेरे रोंगटे खड़े हो गए,
मैं काफी देर तक सोचता रहा की आखिर ये बच्चा अंग्रेजों की तारीफ़ कर रहा था या लोकतंत्र की परिभाषा (जो मैंने अपने बचपन में पढ़ी थी) की बखिया उधेड़ रहा था....!!

शैक्षणिक डिग्रियाँ पाकर भी आज मुझे वो बच्चा मुझसे ज्यादा समझदार लग रहा था क्योंकि उसे लोकतंत्र की परिभाषा इतनी कम उम्र में समझ में आ गयी थी।🇮🇳🇮🇳